Tuesday, November 18, 2008

Blessing Frd ...


Succeed ...


Goal ...


Desire ...


Urself up ...


शुक्रिया आपका ...

शुक्रिया आपका के ऐसी दोस्ती दे दी ,
हमारे सबंध में कैसी सुन्दरता दे दी .

दुनिया में खून के सबंध टूट जाते है ,
पर मुझे दोस्ती में भी केसी पवित्रता दे दी .

कोई भी बात कह सकते है एक - दूजे को ,
दोस्त तुमने तो पूरी की पूरी सत्ता दे दी .



नहीं तोड़ सकते इस दोस्ती को किसी भी तरह
हमारे सबंध में "श्री-श्री" ने केसी अतुट्ता दे दी .

मैं अपूर्ण थी ... आपकी दोस्ती बिना ,
आपने साथ देके कैसी पूर्णता दे दी …

Dedicated to My Gr8 Frd.....

About being ...


मित्रता ...

शब्दों से तो सब कहते है,
शब्दों से क्या कहु ?
मोहब्बत एसी दिल से भरी,
चलो आपको कुछ "दिल" से कहु …

हर तरफ अंधकार ही देखा ,
अंधकार की तो क्या बात कहु ?
सुनहरी किरण बन आए आप् ,
चलो आज आपको "उजास" कहु ….

लगता था हर तरफ़ हताशा ही हताशा है ,
जीवन मैं आये दर्द का क्या कहु ?
हँसा दिया पल भर में आपने,
चलो आपको "प्रेरणा" कहु . . .

दुनिया तो सारी स्वार्थ से भरी ,
स्वार्थी संबंधो को क्या कहु ?
प्यार एसा निस्वार्थ आपका ,
चलो आपको "मित्रता" कहु ..,,

Dedicated to my Gr8 friend …

मौन भी एक सवांद है ...

कुदरत का यह एक अलग अंदाज़ है,

मन सुखा, और बहार बारिश है !



जानती हूँ कभी "मौन भी एक सवांद है",


चलो मौन जियें थोडा, और बहार शोर-बकोर है !!



तडपाती है दोनों, इक तेरी जुदाई, दूसरी तेरी याद,


अच्छी फ़सी मैं, बहार तो दलदल ही दलदल है !!!



बदलाव ...

" हर कोई अपनी जिन्दगी के तमाम मुकाम तय करता है। हर प्रत्येक मुकाम उसे कुछ न कुछ ऊंचाई दे कर जाते है, पर ऐसा भी होता है, कि हम अपने आपको उस मुकाम पर पाते है, कि ख़ुशी या ग़म सब अपने इख्तियार से बाहर नज़र आता है । क्या ये हमारी आदमियत कि सीमाये है, या ईश्वर का दिशा-निर्देश कि, बस यही तक, यही तक हमारा बस है, हम पर । वक़्त रुकता नही और हम भी वक़्त के साथ पल -प्रतिपल बदलते रहते है । यह स्वीकार करना ही चाहिऐ कि वक़्त और व्यक्ति दोनो बदलते रहते है। हां ये अलग बात है कि आदमी का बदलना ज्यादा कष्ट देता है । "

Life Is ...


Monday, November 17, 2008

दोस्ती...

दोस्त - दोस्ती की कोई परिभाषा मुमकिन नहीं होती, क्यों की हर इंसान के लिए दोस्ती के मायने अलग - अलग होते है। दोस्त बनाये नहीं जाते बस बन जाते है। कैसे , कब , कहा पता भी नहीं चलता है। मेरे लिए दोस्ती जिन्दगी की एसी खुश्बू है, जो हर लम्हा, हर पल, महकती रहती है।

Like a Book ...


रिश्ते ...

रिश्ते - ऐसे नहीं बनते .. सच कहा है यह किसी ने …
विश्वास और भावनाओ के जोड़ का फल होता है कोई भी रिश्ता . जहा प्यार, सम्मान , ख़याल और समर्पण की भावना हो . जहा यह भाव ना हो वो रिश्ते कुछ ही समय मैं ताश के पत्तो के महल की तरह हवा के हलके झोके से भी बिखर जाते है … तब मन सोचने लगता है की क्यों भावनाओ की जोड़ नहीं जुड़ रही या कहा अपनी पकड़ छोड़ रही है ? फिर अगले ही पल प्रतीत होता है की यह सिर्फ भावनात्मक ज्ञान का आभाव है, जो किसी भी रिश्ते की नींव हिला देता है .
यह देखने में आता है की, जो रिश्ते शुरुवात में बहोत मजबूत लगते हे, उसकी बुनियाद कुछ दिनों के अन्तराल में मजबूत होने की जगह कमजोर पड़ने लगती है , एसा शायद इसी लिए होता है क्यों की रिश्तो में आपसी भावनात्मक ज्ञान नहीं होता… जब तक यह समझ ना आये रिश्ते एसे ही बनते - बिगड़ते रहेंगे ….
यह भावनात्मक ज्ञान क्या होता है ?
यह किसी व्यक्ति को जानने या समझने का ज्ञान है, खुद पर नियंत्रण रखने का , दुसरो के एहसास को पहचान कर अपने एहसास वहा तक पहुचाने का ज्ञान है . जब किसी व्यक्ति में इन भावनाओ का महत्व और समझ होगी तभी वो किसी रिश्ते को पूर्णता तक ले जा सकता है .