Tuesday, November 18, 2008

मित्रता ...

शब्दों से तो सब कहते है,
शब्दों से क्या कहु ?
मोहब्बत एसी दिल से भरी,
चलो आपको कुछ "दिल" से कहु …

हर तरफ अंधकार ही देखा ,
अंधकार की तो क्या बात कहु ?
सुनहरी किरण बन आए आप् ,
चलो आज आपको "उजास" कहु ….

लगता था हर तरफ़ हताशा ही हताशा है ,
जीवन मैं आये दर्द का क्या कहु ?
हँसा दिया पल भर में आपने,
चलो आपको "प्रेरणा" कहु . . .

दुनिया तो सारी स्वार्थ से भरी ,
स्वार्थी संबंधो को क्या कहु ?
प्यार एसा निस्वार्थ आपका ,
चलो आपको "मित्रता" कहु ..,,

Dedicated to my Gr8 friend …

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