कुदरत का यह एक अलग अंदाज़ है,
मन सुखा, और बहार बारिश है !
जानती हूँ कभी "मौन भी एक सवांद है",
चलो मौन जियें थोडा, और बहार शोर-बकोर है !!
तडपाती है दोनों, इक तेरी जुदाई, दूसरी तेरी याद,
अच्छी फ़सी मैं, बहार तो दलदल ही दलदल है !!!
Tuesday, November 18, 2008
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